एक कौआ एक विशाल पेड़ पर उसके पके के बीज खा रहा था, शाम होने को थी इसलिए बाद के लिए उसने कुछ बीज अपनी चोंच में दबाकर उड़ गया।
वह रास्ते में एक बड़ी इमारत के ऊपर से गुजर रहा था तभी उसकी चोंच से एक बीज फिसल गया और इमारत की दो दीवारों के बीच जा गिरा।

पका हुआ बीज मरते मरते बच गया, उस बीज ने इमारत की दीवारों से आग्रह किया कि वह उसकी रक्षा करें।

वह बीज इमारत की ऊंचाई और सुंदरता के पुल बांधने लगा, और उसकी रक्षा के लिए ईश्वर की कृपा का वास्ता भी दिया।

उसने कहा, अफसोस कि मैं पेड़ से नहीं गिरा नहीं तो ना जाने मेरा क्या होता और अगर मैं कौवे की चोंच से कहीं और गिर जाता तो भी मेरा जीवन खत्म था।

जब वह क्रूर कौवा मुझे चोंच में दबाकर ले जा रहा था तो मैंने ईश्वर से प्रार्थना की, और कसम खाई कि अगर मैं किसी भी तरह बच गया तो अपनी पूरी जिंदगी एक छोटे से छेद में गुजार दूंगा।

इतना कुछ सुनने के बाद इमारत को उस बीज पर तरस आ गया और उसने उस बीज को अपनी दीवारों के बीच शरण दे दी।

कुछ ही हफ्तों में बीज से जड़ें निकलना शुरू हो गई ये जड़े दीवार के पत्थरों के बीच सेंध लगाने लगी और धीरे-धीरे दीवारों को दूर खिसकाने लगी।

पेड़ की शाखाएं ऊपर आसमान की तरफ भी बढ़ने लगी, और कुछ ही समय में वह पेड़ इमारत से भी ऊंचा हो गया। और उसकी जड़ें इतनी मजबूत हो गई कि वह दीवार को खिसकाने लगी और इमारत की नींव को दूर हटाने लगी।

बहुत समय बाद जाकर इमारत को होश आया कि उसकी दया के कारण उसने अपने ही विनाश को आमंत्रित कर लिया, लेकिन अब अफसोस करने का कोई फायदा नहीं था क्योंकि कुछ ही देर बाद इमारत ढह गई।

एक बार एक नौजवान लड़का एक मूर्तिकार के पास जाता है और कहता है कि मुझे भी आपके जैसा होनहार मूर्तिकार बनना है

मूर्तिकार उस लड़के की महत्वाकांक्षा को देखकर सहमति दे देता है और अगले दिन आने को कहता है

अगले दिन उस नौजवान के आते ही मूर्तिकार उसे एक मार्बल का टुकड़ा पकड़ा देता है और खुद मूर्ति बनाने में जुट जाता है

शाम तक उस मूर्तिकार ने उस नौजवान को कोई और कार्य नहीं दिया और उसी टुकड़े को पकड़े रहने के लिए कहा

अब हर रोज यही होने लगा, जैसे ही नौजवान मूर्तिकार के पास पहुंचता मूर्तिकार तुरंत उसे मार्बल का टुकड़ा पकड़ा देता और कहता लो मार्बल का टुकड़ा पकड़ो, और यह कहकर मूर्तिकार फिर अपने काम में जुट जाता

इस बात को 6 दिन गुजर चुके थे और अब उस नौजवान का गुस्सा सातवें आसमान पर था कि इतने दिन होने को आए हैं लेकिन मूर्तिकार ने उसे अभी तक कुछ भी नहीं सिखाया 

और उसने या निश्चय कर लिया था कि यह अब और नहीं चलेगा, और इसी इच्छा से सातवें दिन वह मूर्तिकार के पास गया, और वह मूर्तिकार से यह कहने ही जा रहा था कि इतने में मूर्तिकार ने उसे पत्थर का टुकड़ा देकर कहा “लो मार्बल पकड़ो”

जैसे ही उसने वह टुकड़ा हर दिन की तरह हाथ में लिया तो उसके मुंह से तुरंत निकला यह मार्बल का टुकड़ा नहीं है यह कोई और पत्थर है

और उसके इतना बोलते ही उस मूर्तिकार ने मुस्कुराते हुए कहा, तुमने आज पहला चरण पास कर लिया है

नौजवान इस बात को जानकर हैरान रह गया कि इतने दिनों से अनजाने में उसे पत्थर पहचानने की शिक्षा दी जा रही थी

वह नौजवान तुरंत भावुक हो गया और अपने गुरु के चरणों में गिर गया

दोस्तों दुनिया में ऐसे बहुत सारे लोग हैं बिना सीखे, बिना कुछ किए ही सफल होना चाहते हैं। परंतु इस कहानी से हमें पता चलता है कि सीखने के लिए भी हमें तपना पड़ता है

एक बूढ़ा आदमी अपने नौजवान बेटे के साथ ट्रेन में चढ़ता है, जैसे ही ट्रेन चलती है बेटा खुशी से झूम उठता है

वह इधर-उधर घूमता है कभी खिड़की के पास तो कभी सीट पर, फिर वह खिड़की से अपना हाथ बाहर निकाल कर हवा को महसूस करता है और कहता है देखो पापा सारे पेड़ पौधे पीछे जा रहे हैं।

पिता मुस्कुराते हुए अपने बेटे की बातें सुन रहा था।

फिर वह नौजवान बेटा खिड़की से बाहर बंदरों को देख कर कहता है पापा वह देखो बंदर उछल कूद कर रहे हैं

पापा, देखो फसलें लगी हुई है, कितने सारे आम और अमरुद लगे हुए हैं।पिता सहमति में सिर हिलता है 

इतने में बारिश शुरू हो जाती है और बारिश की बूंदों को वह नौजवान बेटा महसूस करता है और अपने पिता से कहता है, पापा देखो ना बारिश की बूंदे कितनी खूबसूरत हैं

पिता ने एक बार फिर अपने बेटे को देख कर मुस्कुराया और कहां बेटा हां मेरे बेटे यह बहुत खूबसूरत हैं ।

पास में बैठे सभी यात्री इस दृश्य को देख रहे थे, और सभी उस लड़के की बातों और हरकतों अजीब महसूस करने लगे।

तभी एक व्यक्ति ने अपने चश्मे के ऊपर से देखते हुए उस बूढ़े पिता से कहा आप अपने बेटे का किसी अस्पताल में इलाज क्यों नहीं करवाते?

पिता ने शांत भाव से जवाब दिया,  हम अभी अभी अस्पताल से ही आ रहे हैं और मेरे बेटे ने आज पहली बार दुनिया देखी है बचपन से इसकी  आंखों में रोशनी नहीं थी

ओर यह सुनते ही सभी यात्री स्तब्ध रह गए।

दोस्तों, इस दुनिया में हमारे पास जो कुछ भी है उस हर चीज का मोल सिर्फ वही जानता है जिसके पास वह चीज नहीं है।

इसलिए इस संसार में ईश्वर के द्वारा दी गई और बनाई गई हर एक चीज का, हर एक जीव का, हर एक वस्तु का सम्मान करें और उसके मोल को समझें।