MAJOR DHYAN CHAND | क्यों करते थे चाँदनी का इंतजार? | स्टिक पर चुम्बक? | Dr Ujjwal Patni | Motivational Notes

  • Introduction

    • 1928 Netherlands first Olympic- भारतीय हॉकी टीम पहली बार हिस्सा लेने जा रही थी जिसमे ध्यान चंद शामिल थे
    • उस वक्त भारतियों के खिलाफ हर जगह गुलामी, अत्याचार, हीन भावना थी
    • 26th May 1928- स्टेडियम में 20000 हज़ार दर्शक केवल ध्यानचंद को देखने आये थे 
    • Indians trounced Holland  3-0 in the Final- और उस दिन ऐसा लगा हिंदुस्तान ने स्वतंत्रता संग्राम जीत लिया हो 
    • Authorities once broke ध्यानचंद hockey to check magnet
    • He was named “The Magician of Hockey”
    • 29 अगस्त को पूरा भारत National Sports Day मनाता है क्योंकि इसी दिन मेजर ध्यानचंद ने भारत को 3 ओलिंपिक GOLD मैडल दिलाये थे
    • 400 Goal मारने वाले इस खिलाडी के नाम से डॉक् टिकट जारी किया गया और दिल्ली का राष्ट्रीय स्टेडियम मेजर ध्यानचंद स्टेडियम बना
  • क्यों हर रात करते थे चाँद का इंतजार?

    • उस ज़माने में लाइट की व्यवस्था न होने के कारन वो चाँद की रौशनी का इंतजार करते थे ताकि हॉकी खेल सके
    • इलाहाबाद में जन्मे ध्यान सिर्फ 6 वर्ष तक स्कूल जा पाए और 16 साल की उम्र में परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए आर्मी ज्वाइन की, और वहां उनको अपने पहले गुरु मिले – बाला तिवारी 
  • कपड़े नहीं थे तो न्यूज़ीलैंड में क्या किया ?

    • Chand was selected for the Indian Army’s Tour of New Zealand and India won by 21-18. And he was promoted to Lance Naik 
  • पैसों के लिए खेले हर पोर्ट पर मैच

    • Indian Hockey Federation के पास ओलंपिक्स जाने तक के लिए Fund न होने की वजह से अलग अलग शहरों में Exhibition Matches खेले 
    • रास्ते में पोर्ट पर जहाज़ जहां जहां रुकता था वहां टीम रूककर मैच खेलकर पैसा इक्कठ्ठा करती थी ताकि US का खर्चा निकल सके
    • वहां सिर्फ 3 टीम खेल रही थी US, Japan India और उसमे India ने US को 24-1 से धो डाला
    • और मेजर ध्यानचंद ने 8 गोल्ड अपने नाम किया और पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया  
  • वतन के लिए हिटलर से पंगा

    • बर्लिन Olympics 1936 में जर्मनी के खिलाफ पहले वार्मअप मैच में इंडिया 4-1 से हार गयी
    • और २-४ मैच बाद तख्ता पलट गया और मेजर ध्यानचंद का मैजिक शो शुरू हो गया

    • फाइनल मैच जर्मनी के साथ था और हिटलर मैच देखने आया था जो उस समय दुनिया का सबसे बड़ा तानाशाह था और उस मैच में इंडिया ने जर्मनी को 8-1 से धो दिया और हिटलर गुस्से में आगबबूला होकर मैच के बीच से चला गया और ध्यानचंद ने 6 Goal मारे

    • अगले दिन हिटलर ने ध्यानचंद को बुलाया और ध्यानचंद को हिंदुस्तान से सैकड़ों गुना ज्यादा धन-दौलत, पद और सोहरत देने और जर्मनी की तरफ से खेलने को कहा

    • लेकिन ध्यानचंद ने कहा मैं अपने वतन के लिए ही खेलना चाहता हूँ, और सच्ची देशभक्ति दिखाकर ध्यानचंद ने हिंदुस्तान का नाम विश्व में स्वर्ण अक्षरों में लिख दिया 

  • ऐसे आखिरी दिन किसी को न मिले

    • Dhyan Chand resorted to selling his autographs to his fans as a part of his fundraiser for the earthquake victims.
    • In 1979 He was suffering from Liver cancer, No one recognized him, He was placed in the general ward in AIIMS Delhi and died 12 days later.
  • Lesson
    • अच्छे दिनों में ही भविष्य की योजनाएं बनाएं, ताकि बुरे दिन कभी न आएं

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